DRHS❤️ सुस्वागतम् सुस्वागतम् सुस्वागतम् , ऐसेही शुरू हुआ करते थे वहा राष्ट्रीय कार्यक्रम। We are the students of DRHS , बहुत कम हुआ करते थे वहां गेम्स मॅचेस । DRHS की शान तो, थे ही बैकबेंचर्स , पर यह बात उन्हें कौन समझाए, जो वहां थे टीचर्स । ठंडी में शनिवार को, सिर्फ करके जाते थे ब्रश , पहुंचना जो रहता था, आने से पहले क्रश । लंच टाइम में सुनने पड़ते थे देश भक्ति पर गाने , और कुछ गलत, गलती से भी हो जाए तो सुनने पड़ते थे ताने । DRHS के बारे में क्या ही कहना, थी तो बेस्ट , क्योंकि सिर्फ वहा हुआ करती थी, कॉमन मिनिमम टेस्ट । कोई साइकिल, बाइक, कार, ऑटो, बस से पहुंचता था , लेकिन इंतजार सिर्फ दोस्तों से मिलने का रहता था । साइंस लैब में देखा था अनियन पील को माइक्रोस्कोप के नीचे , यह आज पता चला कि बहुत मजे हुआ करते थे पीछे । लेकिन आज जब भी याद करते हैं मुस्कुरा देते हैं, रो भी लेते हैं , तो क्यू ना दोस्तो फिर से मिलते है! ये सब फिर से दोहराते है! - प्राची झोरे....