लम्हे 😇
लम्हे 😇
आज बात हुई,मेरे दोस्तो से।
फुरसत नहीं थी उन्हे, एक्झाम की शिकायत से।
बताने लगे पढ रहे हैं, दस दस घंटो से।
घबराएं हुए थे, एग्जाम और viva की डर से।
लाइफ भी एंजॉय कर रहे वो जैसे तैसे।
किसीने मैच का सिर्फ स्कोर देखा था,
कोई रील्स देख कर हस रहा था,
कोई अपने नए स्वेटर के बारे मैं बता रहा था,
कोई पुरानी बेवकूफी वाली बाते याद कर रहा था।
आज यही बता दू इन्हे,
समेटलो सारे लम्हे।
यही एक कहानी,
होगी कल पुरानी।
पर यही होगा, जो दस साल बाद हसी लायेगा,
फिरसे जीने का मन करेगा।
- प्राची झोरे....

👍
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